दिल आवारा कर लिया जाये

चलो आज फिर से दिल आवारा कर लिया जाये

टूटे हुए हर टुकड़े को सितारा कर लिया जाये

मुत्तासीफ बयार बेरुखी के आने से पहले

चलो किनारा करने वालों से किनारा कर लिया जाये

आहिस्ता आहिस्ता सब छूट जाने का सफर है ये

वक़्त का तकाज़ा है के खुद से ही ताउम्र गुजारा कर लिया जाये

चलो आज फिर से ये दिल आवारा कर लिया जाये

फुरकत में हो दिल और दिल की जोर आजमाइश हो कोई

या आंखों से हुई गुफ़्तगू की हर घड़ी साजिश हो कोई

चलो दूर से ही उन आँखों को आँखों का इशारा कर लिया जाये

चलो आज फिर से दिल आवारा कर लिया जाये

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बदलता वक़्त

कभी मुद्दतों से जमा किया रेत के दानों सा बिखर गया।

अब ना वो वक़्त रहा ना मौसम रहा ना रातें रही ना सहर रहा।

शरगोसियों में ढूंढता था ज़माल-ए-इश्क़ वो आशिक़ कभी,

बेखुदी में  समझा तो बेपरवाह गुफ्तगू भी बे-असर रहा।

एक दो नही हजारों दास्ताँ है उस सफर के साथ वाबस्ता,

बेकशी में देखो ज़रा अब ना वो डगर रहा न सफर रहा।

शिकवे शिकायतों में ज़ाया किया मैंने, सुनहरा वक़्त मेरे हिस्से का,

परखने चला था लोगों को, मिला हर शख्स ज़ुबान-ए-खंज़र रहा

वक़्त दर वक़्त ये वक़्त गुज़रता रहा ,तुम बदलते रहे थोड़ा मैं भी बदलता रहा

हमदोनो के इस बदल में देखोे कैसा बदल गया मौसम,की ना तुम तुम रहे ना मैं मैं रहा।।

Kabhi Hindi Kabhi Urdu

​Hum sab ne boli h kabhi hindi kabhi urdu..

Aham se nhi hum se nikli h kbhi hindi kbhi urdu..

Siyaast e daaw pr bikhri padi h, har taraf laashen

Shaah e nazar me insaan koi nhi, 

Ginti me h koi hindi koi urdu..

Mere majhab ne to jeene ka salika btaya tha mujhko

Pr dekho jara majhab ki aanch me kaise  jalte h 

kbhi hindi kbhi urdu

Jahan nukhte ke badal se khuda ho jaate hn juda

Jahan mout dekar mangi jaati ho zindgi ki dua

Aisi shikaafat e sikaalat me bebas h kbhi hindi kbhi urdu
Is sarjami pe zubaan e mohbbt sahi,

Ya daastan e sitaam sahi mere rehnuma?

Yaad rakh tere bad k nasl ki kahani tere aakhir se hi suru hogi..